श्री रामरक्षा स्तोत्रम

श्री रामरक्षा स्तोत्रम (रामा रक्षा स्तोत्रा ओर राम रक्षा मंतरा) ऋषि बुध कौशिका ने लिखा है. इस स्तोत्र को पड़कर से भगवान रामचंद्र जी हमारे सारे मुशकिलों को दूर कर दें,  और हमे यह विश्वास है भक्तों मे की रामचंद्र जी सुख, संतोष, धन, सम्पुर्ण आरोग्य से भरी जिंदगी देंगे. यह प्रतीत है की इस स्तोत्र को पड़कर से हम नवग्रह के सारे दोषों से  मुखत हो जायेंगे.

श्री रामा रक्षा स्तोत्रा

अस्या श्री रामा रक्षा स्तोत्रा मंत्रस्य बुध कौशिक ऋषि,
श्री सीता रमचंद्रा देवता, अनुष्टूप चंदा,
सीता शक्ति, श्री हनुमान कीलकम,
श्री रमचंद्रा प्रीत्यर्थे रामा रक्षा स्तोत्रा मंत्रह जेप विनियोग .

रामा रक्षा स्तोत्रम ध्यानं

ध्ययेध अजानू बहुँ द्रुता सारा दनुशं बढ़ा पद्मासनास्तां,
पीतम वसो अवसनम नवा कमला डाला स्पर्धी नेतराँ, प्रसन्नम,
वमनगरुदा सीता मुखा कमला मिलालोचानाम नीराधाभं,
डानालांगरा दीप्तम दाता मुरु जाड़ा मंडलम रमचंड्रम.

चरितम रघु नदस्या सता कोटि प्रविस्तराम,
एकैईक्मक्शरम पुंसम महा पताका नसानम. 1

ध्यात्वा नीलोलपाला श्यामां रामां राजीवलोचानाम,
जानकी लक्ष्मनो पेताम जाड़ा माकूता मंडितम,
ससी तूना धनूर बहू पनीं नकथंचरांथकं,
सा लीलया जगत्रतूम अवीरभूततम आज़म विभूम,
रामा रक्षम पड़ेत प्रज्ञा पपज्नीम सर्वा कामाधाम. 2-4

सिरो मे राघवा पतु, फलाँ दासारतात्मजा,
कौसल्एयो द्रसौऊ पतु, विसवमित्रा प्रिया सृति. 5

ग्रानाम पतु मखतरात, मुखाम सौमितरी वत्सला,
जिहवाँ विधयनिधि पतु, कंडम भारतवांदिता,
स्कांडौ दिव्ययुधा पतु, भुजोवभगनेआ करमुखा.
करऔ सितपति पतु, हृदयाँ जमदज्न्याजीत.
मध्यम पदू खरा द्वंसी, नाभीम जंभवदसरया,
सुग्रीवेसा काटीं पतु, सकतीतिनी हनुमत प्रभु.
ऊरू राघूठमा पतुरक्षा कुलविनसा कृत,
जानूनी सेतु कृत पदू, जंघे दासमुखण्डाका,
पड़ौ विभीषणसरीधा, पतु रामोकिलम वपु. 6-9

एताम रामा बालोपेताम रक्षाँ या सुकृती पड़ेत.
सा चिरायु सुखी पुत्री विजयी भवेत. 10

पतला भूतला व्यॉमा चारीना चत्मचारीना,
ना दृष्तुमपी शाकतस्ते रक्षितम रामनामाभी. 11

रामेठी, रामबद्रेती रमचंद्रेती या स्मरण,
नरो ना लिपयते पपैर बूकतीं मुक्तिंचा विंदती. 12

जगज़ैयतराकमंत्रेंा रामनांनाभिरक्षितम,
या कंडे धाराएेतसया कारसता सवा सीधया. 13

वज्रा पंजारा नामेढम यो रामा कवाचम स्मरेठ,
आव्याहथगना सर्वत्रा लाभते जया मंगलम. 14

आदिष्तवँ यादा स्वाप्ने रामारक्षम इमामा हरा,
ताधा लिखितवान प्रथा प्राबूढ़ो बुधकौसीका. 15

आरमा कल्पा वृक्षनाम, विरामा सकालपदम,
अभिरमास्स्त्रिलोकनम, रामा सृिमन ना प्रभु. 16

तरुनौउ रूपा संपन्णौ, सुकुमरौ महा बालौ,
पुंदरीका विसालक्षौ चीरकृष्णा जिनम्बरौ,
फला मूलासिनौ दांतौ तपसौ ब्रह्मचरनौ,
पुत्रौ दासारतास्यतौ ब्रातरौ रामलक्ष्मानौ,
सारान्या सर्वा सातवानाम सरएशत्ौ सर्वा दनुष्मतम,
रक्षा कूला निहांतौ ट्राएेताम नो राघोतमौ. 17-19

आता सज्जा दनुषा विशु स्पृसा,
वक्षया सुगा निशंगा संगिनौ,
रक्षानया मामा रामलक्ष्मना वग्रता,
पढ़ी सदइवा गछठाम. 20

सनधहा कवाची गाडगी छापा बना धरो युवा,
गचन मनोराधॉसमाकाम रामा पतु सा लक्ष्मना. 21

रामो दासाराधी सूरो लक्ष्मानुचारो बाली,
ककुस्ता पुरुषा पूर्णा कौसल्यायो राघोतमा,
वेदांता वेधयो याज्नेसा पुराना पुरुषोत्मा,
जानकी वल्लभा स्रीमन अप्रमेया पराक्रमा,
ईत्हयतनी जापान नित्यम ताड़ भक्ता सरधायान्विता,
अस्वमेधाधिकं पुण्याम संप्रपनोती ना सँसाया. 22-24

रामां दूर्वादला श्यामां पद्माक्षम पीता वाससम,
स्थुवांति नामाभीर दीव्यी ना थे संसारीनो नारा. 25

रामां लक्ष्मना पूर्वाजम रघुवरम सीतपतीं सुंदरम,
ककुस्तं करुनरणवाम गुना निधीं विप्रा प्रियाँ धार्मिकम,
राजेन्द्रम सत्या सॅंडम दासारता थानायांशयामलम्संतामूर्तीं,
वनडे लोकभिरामां, रघुकुला थिलकम्ऱघवम रवनारिं. 26

रामाया रामबद्राया रमचंद्राया वेधासे,
रघु नधाया नधाया सीतया पताए नामा. 27

श्री रामा रामा रघु नंदना रामा रामा,
श्री रामा रामा भारतगरजा रामा रामा,
श्री रामा रामा राणा करकसा रामा रामा रामा,
श्री रमचंद्रा सरनाम भावा रामा रामा. 28

श्री रमचंद्रा चरनौ मानसा स्मरामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ वाचसा ग्रनामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ सिरसा नामामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ सरनाम प्रापाध्य. 29

माता रामो, मत पिता रमचंद्रा,
स्वामी रामो, मत सखा रमचंद्रा,
सर्वस्वाँ मे रमचंड्रो दयालु,
ना अन्यम नैइवा जाने ना जाने. 30

दक्षिने लक्ष्मनो, यस्यए वामे छा जानकठमजा,
पुरतो मारुतीर यस्या थम वनडे रघुनंदनम. 31

लोकभिरामां राणा रंगा धीराम राझीवा नेतराँ रघुवंसा नढ़ाम,
कारुणया रूपंकरुणाकरम थम श्री रमचंड्रम सरनाम प्रापाध्य. 32

मानो जवां, मरुदा तुल्या वेगम,
जितेन्द्रियाँ बुद्धि मातम वरिश्टम,
वता आत्मज़म वनारा युधा मुख्यम,
सरी रामा दूताम सिरसा नामामी. 33

कूजनतम रामा रामेठी मदुराम मादसुरक्षरम,
आरूहया कविता शाखाँ वनडे वाल्मीकि कोकीलम. 34

आपदम आपा हंताराम दातराम दाना सर्वा संपादम,
लोकभिरामां सरीरामां भूयओ भूयओ नामामयाहाँ. 35

भर्जनम भावा भीजनमर्जनम सुखसंपादम,
तर्जनम यामा धूतनाम रामा रामेठी गर्जनम. 36

रामो राजामानी सदा विजयते रामां रमएसम भजे,
रामेनाभहता निसचरा चामू रामाया तस्मै नामा,
रमंनास्ती परायनाँ परठाराम रामस्या दसोस्मयाहाँ,
रमे चिता लाया सदा भावतू मे भो रामा ममुढ़रा. 37

श्री रामा रामा रामेठी रीम रमे मनोरम,
सहस्रा नामा तत्ुल्याँ रामा नामा वारनाने 38

इति बूढ़ा कौशिका विरचितम रामा रक्षा स्तोत्रम संपूर्णां||

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