Archive for April, 2011

लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Devi Aarti)

Saturday, April 30th, 2011

आरती लक्ष्मी जी की – Aarti Lakshmi Ki

ॐ जय लक्ष्मी माता,  मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही हो जग-माता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता ।
जो को‌ई तुमको ध्यावत, ऋद्घि-सिद्घि धन पाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

तुम पाताल बसंती, तुम ही शुभदाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

जिस घर में तुम रहती, सब सद्‍गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न को‌ई पाता ।
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

शुभ-गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।
रत्‍न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

श्री महालक्ष्मीजी की आरती, जो को‌ई नर गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

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श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम – Sri Ashta Laksmi Stotram

Wednesday, April 13th, 2011

श्री अष्टलक्ष्मी  स्तोत्रम – Sri AshtaLaxmi Stotram (Hindi Version) 

अदि लक्ष्मी

सुमनसा वन्धिथा, सुन्धारी, माधवी,चन्द्र सहोधारी हेममये,
मुनिगना मंदिथा, मोक्ष प्रधयिनी,मंजुला भाषिणी, वेदा नुठे,
पंकजा वासिनी देवा सुपूजिथासद्गुना वर्षानी, संथियुठे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी अधिलक्ष्मी सदा पालय माम.

धान्य लक्ष्मी

ईओ कलि कल्मषा नासिनी, कामिनी,वैधिका रूपिणी, वेदा माये,
क्षीर समुध्भावा मंगला रूपिणी,मंत्र निवासिनी, मन्थ्रानुठे,
मंगला धयिनी, अम्बुजा वासिनी,देवा गणर्चिथा पदयुठे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी धान्यलक्ष्मी सदा पालय माम.

धैर्य लक्ष्मी

जाया वारा वर्णनी, वैष्णवी,भार्गवी, मंत्र स्वरूपिणी, मंत्र माये,
सुरगना पूजिता सीग्र पहला प्रधा,जनाना विकासिनी, सस्थ्रानुठे,
भाव भय हरिणी, पापा विमोचिनी,सदु जनार्चिथा पड़ा यूथे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी दैर्यलाक्ष्मी सदा पालय माम.

गज लक्ष्मी

जाया जाया दुर्गाठी नासिनी कामिनी,सर्व पहला प्रधा सस्त्र माये,
राठा गज ठुरागा पदाठी समवृथा,परिजन मंदिथा लोकानुठे,
हरिहर ब्रह्मा सुपूजिता सविता,थापा निवारिणी पड़ा यूथे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी गजलक्ष्मी सदा पालय माम.

संथाना लक्ष्मी

ई कघ वाहिनी, मोहिनी, चक्रिणी,राग विव्र्ध्नी, ज्नानामाये,
गुनगना वारिधि, लोक हिथैशिनी,स्वर सप्ता भूशिथा गाना नुठे,
सकला सुरासुर देवा मुनीस्वर,मन्हावा वन्धिथा पदयुठे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी संथानालाक्ष्मी सदा पालय माम.

विजय लक्ष्मी

जाया कमालासिनी, सद्गाठी दायिनी,जनाना विकासिनी गणमाये,
अनुदिना मर्चिथा कुमकुमा धूसर भूशिथा वासिता वध्यानुठे,
कनाकधरा स्थुथी वैभव वन्दिता शंकर देसिका मान्यपठे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी विजयलक्ष्मी सदा पालय माम.

विद्या लक्ष्मी

प्रनाथा सुरेस्वारी, भारथी, भार्गवी शोक विनासिनी, रथना माये,
मणि माया भूशिथा कर्म विभूशाना,संथी समवृथा हस्यामुखे,
नवा निधि धयिनी कलिमाला हरिणी,कमिथा फलाप्रधा हस्थायुठे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम.

धना लक्ष्मी

धिमिधिमी धिन्धिमी धिन्धिमी धिन्धिमी,दुन्दुभी नाडा सुपूर्नामाये,
घुमाघुमा घुमाघुमा घुमाघुमा,संख निनाधा सुवाध्यनूठे,
वेदा पुरानेथिहासा सुपूजिता,वैधिका मार्ग प्रदर्सयुठे,
जाया जाया हे मधुसूधना कामिनी दनालाक्ष्मी सदा पालय माम.

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श्री रामरक्षा स्तोत्रम

Tuesday, April 12th, 2011

श्री रामरक्षा स्तोत्रम (रामा रक्षा स्तोत्रा ओर राम रक्षा मंतरा) ऋषि बुध कौशिका ने लिखा है. इस स्तोत्र को पड़कर से भगवान रामचंद्र जी हमारे सारे मुशकिलों को दूर कर दें,  और हमे यह विश्वास है भक्तों मे की रामचंद्र जी सुख, संतोष, धन, सम्पुर्ण आरोग्य से भरी जिंदगी देंगे. यह प्रतीत है की इस स्तोत्र को पड़कर से हम नवग्रह के सारे दोषों से  मुखत हो जायेंगे.

श्री रामा रक्षा स्तोत्रा

अस्या श्री रामा रक्षा स्तोत्रा मंत्रस्य बुध कौशिक ऋषि,
श्री सीता रमचंद्रा देवता, अनुष्टूप चंदा,
सीता शक्ति, श्री हनुमान कीलकम,
श्री रमचंद्रा प्रीत्यर्थे रामा रक्षा स्तोत्रा मंत्रह जेप विनियोग .

रामा रक्षा स्तोत्रम ध्यानं

ध्ययेध अजानू बहुँ द्रुता सारा दनुशं बढ़ा पद्मासनास्तां,
पीतम वसो अवसनम नवा कमला डाला स्पर्धी नेतराँ, प्रसन्नम,
वमनगरुदा सीता मुखा कमला मिलालोचानाम नीराधाभं,
डानालांगरा दीप्तम दाता मुरु जाड़ा मंडलम रमचंड्रम.

चरितम रघु नदस्या सता कोटि प्रविस्तराम,
एकैईक्मक्शरम पुंसम महा पताका नसानम. 1

ध्यात्वा नीलोलपाला श्यामां रामां राजीवलोचानाम,
जानकी लक्ष्मनो पेताम जाड़ा माकूता मंडितम,
ससी तूना धनूर बहू पनीं नकथंचरांथकं,
सा लीलया जगत्रतूम अवीरभूततम आज़म विभूम,
रामा रक्षम पड़ेत प्रज्ञा पपज्नीम सर्वा कामाधाम. 2-4

सिरो मे राघवा पतु, फलाँ दासारतात्मजा,
कौसल्एयो द्रसौऊ पतु, विसवमित्रा प्रिया सृति. 5

ग्रानाम पतु मखतरात, मुखाम सौमितरी वत्सला,
जिहवाँ विधयनिधि पतु, कंडम भारतवांदिता,
स्कांडौ दिव्ययुधा पतु, भुजोवभगनेआ करमुखा.
करऔ सितपति पतु, हृदयाँ जमदज्न्याजीत.
मध्यम पदू खरा द्वंसी, नाभीम जंभवदसरया,
सुग्रीवेसा काटीं पतु, सकतीतिनी हनुमत प्रभु.
ऊरू राघूठमा पतुरक्षा कुलविनसा कृत,
जानूनी सेतु कृत पदू, जंघे दासमुखण्डाका,
पड़ौ विभीषणसरीधा, पतु रामोकिलम वपु. 6-9

एताम रामा बालोपेताम रक्षाँ या सुकृती पड़ेत.
सा चिरायु सुखी पुत्री विजयी भवेत. 10

पतला भूतला व्यॉमा चारीना चत्मचारीना,
ना दृष्तुमपी शाकतस्ते रक्षितम रामनामाभी. 11

रामेठी, रामबद्रेती रमचंद्रेती या स्मरण,
नरो ना लिपयते पपैर बूकतीं मुक्तिंचा विंदती. 12

जगज़ैयतराकमंत्रेंा रामनांनाभिरक्षितम,
या कंडे धाराएेतसया कारसता सवा सीधया. 13

वज्रा पंजारा नामेढम यो रामा कवाचम स्मरेठ,
आव्याहथगना सर्वत्रा लाभते जया मंगलम. 14

आदिष्तवँ यादा स्वाप्ने रामारक्षम इमामा हरा,
ताधा लिखितवान प्रथा प्राबूढ़ो बुधकौसीका. 15

आरमा कल्पा वृक्षनाम, विरामा सकालपदम,
अभिरमास्स्त्रिलोकनम, रामा सृिमन ना प्रभु. 16

तरुनौउ रूपा संपन्णौ, सुकुमरौ महा बालौ,
पुंदरीका विसालक्षौ चीरकृष्णा जिनम्बरौ,
फला मूलासिनौ दांतौ तपसौ ब्रह्मचरनौ,
पुत्रौ दासारतास्यतौ ब्रातरौ रामलक्ष्मानौ,
सारान्या सर्वा सातवानाम सरएशत्ौ सर्वा दनुष्मतम,
रक्षा कूला निहांतौ ट्राएेताम नो राघोतमौ. 17-19

आता सज्जा दनुषा विशु स्पृसा,
वक्षया सुगा निशंगा संगिनौ,
रक्षानया मामा रामलक्ष्मना वग्रता,
पढ़ी सदइवा गछठाम. 20

सनधहा कवाची गाडगी छापा बना धरो युवा,
गचन मनोराधॉसमाकाम रामा पतु सा लक्ष्मना. 21

रामो दासाराधी सूरो लक्ष्मानुचारो बाली,
ककुस्ता पुरुषा पूर्णा कौसल्यायो राघोतमा,
वेदांता वेधयो याज्नेसा पुराना पुरुषोत्मा,
जानकी वल्लभा स्रीमन अप्रमेया पराक्रमा,
ईत्हयतनी जापान नित्यम ताड़ भक्ता सरधायान्विता,
अस्वमेधाधिकं पुण्याम संप्रपनोती ना सँसाया. 22-24

रामां दूर्वादला श्यामां पद्माक्षम पीता वाससम,
स्थुवांति नामाभीर दीव्यी ना थे संसारीनो नारा. 25

रामां लक्ष्मना पूर्वाजम रघुवरम सीतपतीं सुंदरम,
ककुस्तं करुनरणवाम गुना निधीं विप्रा प्रियाँ धार्मिकम,
राजेन्द्रम सत्या सॅंडम दासारता थानायांशयामलम्संतामूर्तीं,
वनडे लोकभिरामां, रघुकुला थिलकम्ऱघवम रवनारिं. 26

रामाया रामबद्राया रमचंद्राया वेधासे,
रघु नधाया नधाया सीतया पताए नामा. 27

श्री रामा रामा रघु नंदना रामा रामा,
श्री रामा रामा भारतगरजा रामा रामा,
श्री रामा रामा राणा करकसा रामा रामा रामा,
श्री रमचंद्रा सरनाम भावा रामा रामा. 28

श्री रमचंद्रा चरनौ मानसा स्मरामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ वाचसा ग्रनामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ सिरसा नामामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ सरनाम प्रापाध्य. 29

माता रामो, मत पिता रमचंद्रा,
स्वामी रामो, मत सखा रमचंद्रा,
सर्वस्वाँ मे रमचंड्रो दयालु,
ना अन्यम नैइवा जाने ना जाने. 30

दक्षिने लक्ष्मनो, यस्यए वामे छा जानकठमजा,
पुरतो मारुतीर यस्या थम वनडे रघुनंदनम. 31

लोकभिरामां राणा रंगा धीराम राझीवा नेतराँ रघुवंसा नढ़ाम,
कारुणया रूपंकरुणाकरम थम श्री रमचंड्रम सरनाम प्रापाध्य. 32

मानो जवां, मरुदा तुल्या वेगम,
जितेन्द्रियाँ बुद्धि मातम वरिश्टम,
वता आत्मज़म वनारा युधा मुख्यम,
सरी रामा दूताम सिरसा नामामी. 33

कूजनतम रामा रामेठी मदुराम मादसुरक्षरम,
आरूहया कविता शाखाँ वनडे वाल्मीकि कोकीलम. 34

आपदम आपा हंताराम दातराम दाना सर्वा संपादम,
लोकभिरामां सरीरामां भूयओ भूयओ नामामयाहाँ. 35

भर्जनम भावा भीजनमर्जनम सुखसंपादम,
तर्जनम यामा धूतनाम रामा रामेठी गर्जनम. 36

रामो राजामानी सदा विजयते रामां रमएसम भजे,
रामेनाभहता निसचरा चामू रामाया तस्मै नामा,
रमंनास्ती परायनाँ परठाराम रामस्या दसोस्मयाहाँ,
रमे चिता लाया सदा भावतू मे भो रामा ममुढ़रा. 37

श्री रामा रामा रामेठी रीम रमे मनोरम,
सहस्रा नामा तत्ुल्याँ रामा नामा वारनाने 38

इति बूढ़ा कौशिका विरचितम रामा रक्षा स्तोत्रम संपूर्णां||

रामा रक्षा स्तोत्रा वीडियो सॉंग – डिवोशनल प्रेयर तो लॉर्ड राम