Archive for September, 2010

शनि अष्टोत्तरशतनामावलि

Tuesday, September 21st, 2010

शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः – Shani Dev Ashtottarams (108 Names)

 शनि बीज मन्त्र – Shani Beej Mantra :  ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥

 

ॐ शनैश्चराय नमः ॥

ॐ शान्ताय नमः ॥

ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः ॥

ॐ शरण्याय नमः ॥

ॐ वरेण्याय नमः ॥

ॐ सर्वेशाय नमः ॥

ॐ सौम्याय नमः ॥

ॐ सुरवन्द्याय नमः ॥

ॐ सुरलोकविहारिणे नमः ॥

ॐ सुखासनोपविष्टाय नमः ॥

ॐ सुन्दराय नमः ॥

ॐ घनाय नमः ॥

ॐ घनरूपाय नमः ॥

ॐ घनाभरणधारिणे नमः ॥

ॐ घनसारविलेपाय नमः ॥

ॐ खद्योताय नमः ॥

ॐ मन्दाय नमः ॥

ॐ मन्दचेष्टाय नमः ॥

ॐ महनीयगुणात्मने नमः ॥

ॐ मर्त्यपावनपदाय नमः ॥

ॐ महेशाय नमः ॥

ॐ छायापुत्राय नमः ॥

ॐ शर्वाय नमः ॥

ॐ शततूणीरधारिणे नमः ॥

ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमः ॥

ॐ अचञ्चलाय नमः ॥

ॐ नीलवर्णाय नमः ॥

ॐ नित्याय नमः ॥

ॐ नीलाञ्जननिभाय नमः ॥

ॐ नीलाम्बरविभूशणाय नमः ॥

ॐ निश्चलाय नमः ॥

ॐ वेद्याय नमः ॥

ॐ विधिरूपाय नमः ॥

ॐ विरोधाधारभूमये नमः ॥

ॐ भेदास्पदस्वभावाय नमः ॥

ॐ वज्रदेहाय नमः ॥

ॐ वैराग्यदाय नमः ॥

ॐ वीराय नमः ॥

ॐ वीतरोगभयाय नमः ॥

ॐ विपत्परम्परेशाय नमः ॥

ॐ विश्ववन्द्याय नमः ॥

ॐ गृध्नवाहाय नमः ॥

ॐ गूढाय नमः ॥

ॐ कूर्माङ्गाय नमः ॥

ॐ कुरूपिणे नमः ॥

ॐ कुत्सिताय नमः ॥

ॐ गुणाढ्याय नमः ॥

ॐ गोचराय नमः ॥

ॐ अविद्यामूलनाशाय नमः ॥

ॐ विद्याविद्यास्वरूपिणे नमः ॥

ॐ आयुष्यकारणाय नमः ॥

ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः ॥

ॐ विष्णुभक्ताय नमः ॥

ॐ वशिने नमः ॥

ॐ विविधागमवेदिने नमः ॥

ॐ विधिस्तुत्याय नमः ॥

ॐ वन्द्याय नमः ॥

ॐ विरूपाक्षाय नमः ॥

ॐ वरिष्ठाय नमः ॥

ॐ गरिष्ठाय नमः ॥

ॐ वज्राङ्कुशधराय नमः ॥

ॐ वरदाभयहस्ताय नमः ॥

ॐ वामनाय नमः ॥

ॐ ज्येष्ठापत्नीसमेताय नमः ॥

ॐ श्रेष्ठाय नमः ॥

ॐ मितभाषिणे नमः ॥

ॐ कष्टौघनाशकर्त्रे नमः ॥

ॐ पुष्टिदाय नमः ॥

ॐ स्तुत्याय नमः ॥

ॐ स्तोत्रगम्याय नमः ॥

ॐ भक्तिवश्याय नमः ॥

ॐ भानवे नमः ॥

ॐ भानुपुत्राय नमः ॥

ॐ भव्याय नमः ॥

ॐ पावनाय नमः ॥

ॐ धनुर्मण्डलसंस्थाय नमः ॥

ॐ धनदाय नमः ॥

ॐ धनुष्मते नमः ॥

ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः ॥

ॐ तामसाय नमः ॥

ॐ अशेषजनवन्द्याय नमः ॥

ॐ विशेशफलदायिने नमः ॥

ॐ वशीकृतजनेशाय नमः ॥

ॐ पशूनां पतये नमः ॥

ॐ खेचराय नमः ॥

ॐ खगेशाय नमः ॥

ॐ घननीलाम्बराय नमः ॥

ॐ काठिन्यमानसाय नमः ॥

ॐ आर्यगणस्तुत्याय नमः ॥

ॐ नीलच्छत्राय नमः ॥

ॐ नित्याय नमः ॥

ॐ निर्गुणाय नमः ॥

ॐ गुणात्मने नमः ॥

ॐ निरामयाय नमः ॥

ॐ निन्द्याय नमः ॥

ॐ वन्दनीयाय नमः ॥

ॐ धीराय नमः ॥

ॐ दिव्यदेहाय नमः ॥

ॐ दीनार्तिहरणाय नमः ॥

ॐ दैन्यनाशकराय नमः ॥

ॐ आर्यजनगण्याय नमः ॥

ॐ क्रूराय नमः ॥

ॐ क्रूरचेष्टाय नमः ॥

ॐ कामक्रोधकराय नमः ॥

ॐ कलत्रपुत्रशत्रुत्वकारणाय नमः ॥

ॐ परिपोषितभक्ताय नमः ॥

ॐ परभीतिहराय नमः ॥

ॐ भक्तसंघमनोऽभीष्टफलदाय नमः ॥

॥इति शनि अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥

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श्री शनिदेव चालीसा & आरती

Tuesday, September 21st, 2010

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।
दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥
परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं आरिहिं संहारा ॥
पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन ॥
सौरी, मन्द, शनि, दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । रंकहुं राव करैंक्षण माहीं ॥
पर्वतहू तृण हो‌ई निहारत । तृण हू को पर्वत करि डारत ॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हो । कैके‌इहुं की मति हरि लीन्हों ॥
बनहूं में मृग कपट दिखा‌ई । मातु जानकी ग‌ई चतुरा‌ई ॥
लखनहिं शक्ति विकल करि डारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥
रावण की गति-मति बौरा‌ई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ा‌ई ॥
दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥
हार नौलाखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥
विनय राग दीपक महं कीन्हों । तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों ॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥
तैसे नल परदशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद ग‌ई पानी ॥
श्री शंकरहि गहयो जब जा‌ई । पार्वती को सती करा‌ई ॥
तनिक विलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रौपदी होति उघारी ॥
कौरव के भी गति मति मारयो । युद्घ महाभारत करि डारयो ॥
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥
शेष देव-लखि विनती ला‌ई । रवि को मुख ते दियो छुड़‌ई ॥
वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥
जम्बुक सिंह आदि नखधारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

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श्री गणेश चालीसा

Tuesday, September 21st, 2010

श्री गणेश चालीसा

जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥

जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभ काजू ॥

जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायक बुद्घि विधाता ॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता । गौरी ललन विश्व-विख्याता ॥

ऋद्घि-सिद्घि तव चंवर सुधारे । मूषक वाहन सोहत द्घारे ॥

कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी । अति शुचि पावन मंगलकारी ॥

एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी ।

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा ॥

अतिथि जानि कै गौरि सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्घि विशाला । बिना गर्भ धारण, यहि काला ॥

गणनायक, गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम, रुप भगवाना ॥

अस कहि अन्तर्धान रुप है । पलना पर बालक स्वरुप है ॥

बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना ॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ॥

गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो । उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो ॥

कहन लगे शनि, मन सकुचा‌ई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखा‌ई ॥

नहिं विश्वास, उमा उर भय‌ऊ । शनि सों बालक देखन कहा‌ऊ ॥

पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा । बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

गिरिजा गिरीं विकल है धरणी । सो दुख दशा गयो नहीं वरणी ॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा । शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा ॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटि चक्र सो गज शिर लाये ॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण, मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे ॥

बुद्घि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

चले षडानन, भरमि भुला‌ई । रचे बैठ तुम बुद्घि उपा‌ई ॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥

तुम्हरी महिमा बुद्घि बड़ा‌ई । शेष सहसमुख सके न गा‌ई ॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दर्वासा ॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै । अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ॥

॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश ॥

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श्री साई अश्तोत्तरशत नामावलि – SaiBaba Ashtotharas

Saturday, September 18th, 2010

श्री शिरीदी साई अष्टोत्तरशत नामावलि (Lord Saibaba Ashottarams)

ॐ श्री सच्चितानान्दा सदगुरु साईनाथाय महाराज  की जय

1. ॐ श्री साई नाथाय नमः
2. ॐ श्री साई लक्ष्मीनारायनाय नमः
3. ॐ श्री साई कृष्णरामशिव मारुत्यादिरुपाय नमः
4. ॐ श्री साई शेषशायिने नमः
5. ॐ श्री साई गोदावरीतट शीलधीवासिने नमः
6. ॐ श्री साई भक्तहृदालयाय नमः
7. ॐ श्री साईं सर्वहन्नीललाय नमः
8. ॐ श्री साई भूतवासाय नमः
9. ॐ श्री साई भूतभविष्यदभाववार्जिताय नमः
10. ॐ श्री साई कालातीताय नमः
11. ॐ श्री साई कालाय नमः
12. ॐ श्री साई कालकालाय नमः
13. ॐ श्री साई कालदर्पदमनाय नमः
14. ॐ श्री साई मृत्युंजय नमः
15. ॐ श्री साई अमर्त्याय नमः
16. ॐ श्री साई मत्यभयप्रदाय नमः
17. ॐ श्री साई जीवाधाराय नमः
18. ॐ श्री साई सर्वाधाराय नमः
19. ॐ श्री साई भक्तावनसमर्थाय नमः
20. ॐ श्री साई भक्तावन प्रतिज्ञान नमः
21. ॐ श्री साई अन्नवस्त्रदाय नमः
22. ॐ श्री साई आरोग्यक्षेमदाय नमः
23. ॐ श्री साई धनमांगल्यप्रदाय नमः
24. ॐ श्री साई रिद्धिसिद्धिदाय नमः
25. ॐ श्री साई पुत्रमित्रकलबन्धुदाय नमः
26. ॐ श्री साई योगक्षेमवहाय नमः
27. ॐ श्री साई आपद् बान्धवाय नमः
28. ॐ श्री साई मार्गबन्धवे नमः
29. ॐ श्री साई भुक्तिमुक्ति स्वर्गापवर्गदाय नमः
30. ॐ श्री साई प्रियाय नमः
31. ॐ श्री साई प्रीति वर्धनाय नमः
32. ॐ श्री साई अंतर्यामिने नमः
33. ॐ श्री साई सच्चिदात्मने नमः
34. ॐ श्री साई नित्यानंदाय नमः
35. ॐ श्री साई परमसुखदाय नमः
36. ॐ श्री साई परमेश्वराय नमः
37. ॐ श्री साई परब्रह्मणे नमः
38. ॐ श्री साई परमात्मने नमः
39. ॐ श्री साई ज्ञानस्वरूपिणे नमः
40. ॐ श्री साई जगतपित्रे नमः
41. ॐ श्री साई भक्तानां मात्रुधात्रूपितामहाय नमः
42. ॐ श्री साई भक्ताभयप्रदाय नमः
43. ॐ श्री साई भक्तपराधीनाय नमः
44. ॐ श्री साई भक्तानुग्रहकातराय नमः
45. ॐ श्री साई शरणागतवत्सलाय नमः
46. ॐ श्री साई भक्तिशक्तिप्रदाय नमः
47. ॐ श्री साई ज्ञानवैराग्यदाय नमः
48. ॐ श्री साई प्रेमप्रदाय नमः
49. ॐ श्री साई संशय ह्रदय दौर्बल्य पापकर्म नमः
50. ॐ श्री साई ह्रदयग्रंथिभेदकाय नमः
51. ॐ श्री साई कर्मध्वंसिने नमः
52. ॐ श्री साई शुद्ध सत्वस्थिताय नमः
53. ॐ श्री साई गुणातीत गुणात्मने नमः
54. ॐ श्री साई अनंत कल्याणगुणाय नमः
55. ॐ श्री साई अमितपराक्रमाय नमः
56. ॐ श्री साई जयिने नमः
57. ॐ श्री साई दुर्धर्षाक्षोभ्याय नमः
58. ॐ श्री साई अपराजिताय नमः
59. ॐ श्री साई त्रिलोकेशु अविघातगतये नमः
60. ॐ श्री साईं अशक्यरहिताय नमः
61. ॐ श्री साईं सर्वशक्तिमुर्तये नमः
62. ॐ श्री साईं सुरूपसुन्दराय नमः
63. ॐ श्री साईं सुलोचनाय नमः
64. ॐ श्री साईं बहुरूपविश्वमुर्तये नमः
65. ॐ श्री साईं अरूपाव्यक्ताय नमः
66. ॐ श्री साईं अचिन्त्याय नमः
67. ॐ श्री साईं सूक्ष्माय नमः
68. ॐ श्री साईं सर्वन्तार्यामिने नमः
69. ॐ श्री साईं मनोवागतीताय नमः
70. ॐ श्री साईं प्रेममूर्तये नमः
71. ॐ श्री साईं सुलभदुर्लभाय नमः
72. ॐ श्री साईं असहायसहायाय नमः
73. ॐ श्री साईं अनाथनाथदीनबन्धवे नमः
74. ॐ श्री साईं सर्वभारभ्रुते नमः
75. ॐ श्री साईं अकर्मानेककर्मसुकर्मिने नमः
76. ॐ श्री साईं पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः
77. ॐ श्री साईं तीर्थाय नमः
78. ॐ श्री साईं वासुदेवाय नमः
79. ॐ श्री साईं सतांगतये नमः
80. ॐ श्री साईं सत्परायनाय नमः
81. ॐ श्री साईं लोकनाथाय नमः
82. ॐ श्री साईं पावनान्घाय नमः
83. ॐ श्री साईं अम्रुतांशवे नमः
84. ॐ श्री साईं भास्करप्रभाय नमः
85. ॐ श्री साईं ब्रह्मचर्य तपश्चर्यादि सुव्रताय नमः
86. ॐ श्री साईं सत्यधर्मंपरायनाय नमः
87. ॐ श्री साईं सिद्धेश्वराय नमः
88. ॐ श्री साईं सिद्धसंकल्पाय नमः
89. ॐ श्री साईं योगेश्वराय नमः
90. ॐ श्री साईं भगवते नमः
91. ॐ श्री साईं भक्तवत्सलाय नमः
92. ॐ श्री साईं सत्पुरुषाय नमः
93. ॐ श्री साईं पुरुषोत्तमाय नमः
94. ॐ श्री साईं सत्यतत्त्वबोधकाय नमः
95. ॐ श्री साईं कामदिषड्वैरिध्वंसिने नमः
96. ॐ श्री साईं अभेदानंदानुभवप्रदाय नमः
97. ॐ श्री साईं समसर्वमतसमताय नमः
98. ॐ श्री साईं दक्षिणामूर्तये नमः
99. ॐ श्री साईं वेन्कतेशरमनाय नमः
100. ॐ श्री साईं अदभुतानन्तचर्याय नमः
101. ॐ श्री साईं प्रपन्नार्तिहराय नमः
102. ॐ श्री साईं संसारसर्वदुःखक्षयकराय नमः
103. ॐ श्री साईं सर्ववित्सर्वतोमुखाय नमः
104. ॐ श्री साईं सर्वान्तर्बहि: स्थिताय नमः
105. ॐ श्री साईं सर्वमंगलकराय नमः
106. ॐ श्री साईं सर्वाभीष्टप्रदाय नमः
107. ॐ श्री साईं समरससनमार्गस्थापनाय नमः
108. ॐ श्री साईं समर्थ सदगुरु साईनाथाय नमः

ॐ श्री सच्चितानान्दा सदगुरु साईनाथाय महाराज  की जय

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