Archive for the ‘श्री राम’ Category

श्री रामरक्षा स्तोत्रम

Tuesday, April 12th, 2011

श्री रामरक्षा स्तोत्रम (रामा रक्षा स्तोत्रा ओर राम रक्षा मंतरा) ऋषि बुध कौशिका ने लिखा है. इस स्तोत्र को पड़कर से भगवान रामचंद्र जी हमारे सारे मुशकिलों को दूर कर दें,  और हमे यह विश्वास है भक्तों मे की रामचंद्र जी सुख, संतोष, धन, सम्पुर्ण आरोग्य से भरी जिंदगी देंगे. यह प्रतीत है की इस स्तोत्र को पड़कर से हम नवग्रह के सारे दोषों से  मुखत हो जायेंगे.

श्री रामा रक्षा स्तोत्रा

अस्या श्री रामा रक्षा स्तोत्रा मंत्रस्य बुध कौशिक ऋषि,
श्री सीता रमचंद्रा देवता, अनुष्टूप चंदा,
सीता शक्ति, श्री हनुमान कीलकम,
श्री रमचंद्रा प्रीत्यर्थे रामा रक्षा स्तोत्रा मंत्रह जेप विनियोग .

रामा रक्षा स्तोत्रम ध्यानं

ध्ययेध अजानू बहुँ द्रुता सारा दनुशं बढ़ा पद्मासनास्तां,
पीतम वसो अवसनम नवा कमला डाला स्पर्धी नेतराँ, प्रसन्नम,
वमनगरुदा सीता मुखा कमला मिलालोचानाम नीराधाभं,
डानालांगरा दीप्तम दाता मुरु जाड़ा मंडलम रमचंड्रम.

चरितम रघु नदस्या सता कोटि प्रविस्तराम,
एकैईक्मक्शरम पुंसम महा पताका नसानम. 1

ध्यात्वा नीलोलपाला श्यामां रामां राजीवलोचानाम,
जानकी लक्ष्मनो पेताम जाड़ा माकूता मंडितम,
ससी तूना धनूर बहू पनीं नकथंचरांथकं,
सा लीलया जगत्रतूम अवीरभूततम आज़म विभूम,
रामा रक्षम पड़ेत प्रज्ञा पपज्नीम सर्वा कामाधाम. 2-4

सिरो मे राघवा पतु, फलाँ दासारतात्मजा,
कौसल्एयो द्रसौऊ पतु, विसवमित्रा प्रिया सृति. 5

ग्रानाम पतु मखतरात, मुखाम सौमितरी वत्सला,
जिहवाँ विधयनिधि पतु, कंडम भारतवांदिता,
स्कांडौ दिव्ययुधा पतु, भुजोवभगनेआ करमुखा.
करऔ सितपति पतु, हृदयाँ जमदज्न्याजीत.
मध्यम पदू खरा द्वंसी, नाभीम जंभवदसरया,
सुग्रीवेसा काटीं पतु, सकतीतिनी हनुमत प्रभु.
ऊरू राघूठमा पतुरक्षा कुलविनसा कृत,
जानूनी सेतु कृत पदू, जंघे दासमुखण्डाका,
पड़ौ विभीषणसरीधा, पतु रामोकिलम वपु. 6-9

एताम रामा बालोपेताम रक्षाँ या सुकृती पड़ेत.
सा चिरायु सुखी पुत्री विजयी भवेत. 10

पतला भूतला व्यॉमा चारीना चत्मचारीना,
ना दृष्तुमपी शाकतस्ते रक्षितम रामनामाभी. 11

रामेठी, रामबद्रेती रमचंद्रेती या स्मरण,
नरो ना लिपयते पपैर बूकतीं मुक्तिंचा विंदती. 12

जगज़ैयतराकमंत्रेंा रामनांनाभिरक्षितम,
या कंडे धाराएेतसया कारसता सवा सीधया. 13

वज्रा पंजारा नामेढम यो रामा कवाचम स्मरेठ,
आव्याहथगना सर्वत्रा लाभते जया मंगलम. 14

आदिष्तवँ यादा स्वाप्ने रामारक्षम इमामा हरा,
ताधा लिखितवान प्रथा प्राबूढ़ो बुधकौसीका. 15

आरमा कल्पा वृक्षनाम, विरामा सकालपदम,
अभिरमास्स्त्रिलोकनम, रामा सृिमन ना प्रभु. 16

तरुनौउ रूपा संपन्णौ, सुकुमरौ महा बालौ,
पुंदरीका विसालक्षौ चीरकृष्णा जिनम्बरौ,
फला मूलासिनौ दांतौ तपसौ ब्रह्मचरनौ,
पुत्रौ दासारतास्यतौ ब्रातरौ रामलक्ष्मानौ,
सारान्या सर्वा सातवानाम सरएशत्ौ सर्वा दनुष्मतम,
रक्षा कूला निहांतौ ट्राएेताम नो राघोतमौ. 17-19

आता सज्जा दनुषा विशु स्पृसा,
वक्षया सुगा निशंगा संगिनौ,
रक्षानया मामा रामलक्ष्मना वग्रता,
पढ़ी सदइवा गछठाम. 20

सनधहा कवाची गाडगी छापा बना धरो युवा,
गचन मनोराधॉसमाकाम रामा पतु सा लक्ष्मना. 21

रामो दासाराधी सूरो लक्ष्मानुचारो बाली,
ककुस्ता पुरुषा पूर्णा कौसल्यायो राघोतमा,
वेदांता वेधयो याज्नेसा पुराना पुरुषोत्मा,
जानकी वल्लभा स्रीमन अप्रमेया पराक्रमा,
ईत्हयतनी जापान नित्यम ताड़ भक्ता सरधायान्विता,
अस्वमेधाधिकं पुण्याम संप्रपनोती ना सँसाया. 22-24

रामां दूर्वादला श्यामां पद्माक्षम पीता वाससम,
स्थुवांति नामाभीर दीव्यी ना थे संसारीनो नारा. 25

रामां लक्ष्मना पूर्वाजम रघुवरम सीतपतीं सुंदरम,
ककुस्तं करुनरणवाम गुना निधीं विप्रा प्रियाँ धार्मिकम,
राजेन्द्रम सत्या सॅंडम दासारता थानायांशयामलम्संतामूर्तीं,
वनडे लोकभिरामां, रघुकुला थिलकम्ऱघवम रवनारिं. 26

रामाया रामबद्राया रमचंद्राया वेधासे,
रघु नधाया नधाया सीतया पताए नामा. 27

श्री रामा रामा रघु नंदना रामा रामा,
श्री रामा रामा भारतगरजा रामा रामा,
श्री रामा रामा राणा करकसा रामा रामा रामा,
श्री रमचंद्रा सरनाम भावा रामा रामा. 28

श्री रमचंद्रा चरनौ मानसा स्मरामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ वाचसा ग्रनामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ सिरसा नामामी,
श्री रमचंद्रा चरनौ सरनाम प्रापाध्य. 29

माता रामो, मत पिता रमचंद्रा,
स्वामी रामो, मत सखा रमचंद्रा,
सर्वस्वाँ मे रमचंड्रो दयालु,
ना अन्यम नैइवा जाने ना जाने. 30

दक्षिने लक्ष्मनो, यस्यए वामे छा जानकठमजा,
पुरतो मारुतीर यस्या थम वनडे रघुनंदनम. 31

लोकभिरामां राणा रंगा धीराम राझीवा नेतराँ रघुवंसा नढ़ाम,
कारुणया रूपंकरुणाकरम थम श्री रमचंड्रम सरनाम प्रापाध्य. 32

मानो जवां, मरुदा तुल्या वेगम,
जितेन्द्रियाँ बुद्धि मातम वरिश्टम,
वता आत्मज़म वनारा युधा मुख्यम,
सरी रामा दूताम सिरसा नामामी. 33

कूजनतम रामा रामेठी मदुराम मादसुरक्षरम,
आरूहया कविता शाखाँ वनडे वाल्मीकि कोकीलम. 34

आपदम आपा हंताराम दातराम दाना सर्वा संपादम,
लोकभिरामां सरीरामां भूयओ भूयओ नामामयाहाँ. 35

भर्जनम भावा भीजनमर्जनम सुखसंपादम,
तर्जनम यामा धूतनाम रामा रामेठी गर्जनम. 36

रामो राजामानी सदा विजयते रामां रमएसम भजे,
रामेनाभहता निसचरा चामू रामाया तस्मै नामा,
रमंनास्ती परायनाँ परठाराम रामस्या दसोस्मयाहाँ,
रमे चिता लाया सदा भावतू मे भो रामा ममुढ़रा. 37

श्री रामा रामा रामेठी रीम रमे मनोरम,
सहस्रा नामा तत्ुल्याँ रामा नामा वारनाने 38

इति बूढ़ा कौशिका विरचितम रामा रक्षा स्तोत्रम संपूर्णां||

रामा रक्षा स्तोत्रा वीडियो सॉंग – डिवोशनल प्रेयर तो लॉर्ड राम

श्री राम अश्तोत्तरशत नामावलि (Sri Rama Ashtottarams)

Thursday, May 13th, 2010

श्रीरामाष्टोत्तर शतनामावलि  -  108 Names of Sri Rama

ॐ श्रीरामाय नमः 

ॐ रामभद्राय नमः 

ॐ रामचंद्राय नमः 

ॐ शाश्वताय नमः 

ॐ राजीवलोचनाय नमः 

ॐ श्रीमते नमः 

ॐ राजेंद्राय नमः 

ॐ रघुपुङ्गवाय नमः 

ॐ जानकीवल्लभाय नमः 

ॐ जैत्राय नमः    

ॐ जितामित्राय नमः 

ॐ जनार्दनाय नमः 

ॐ विश्वामित्रप्रियाय नमः 

ॐ दांताय नमः 

ॐ शरणत्राणतत्पराय नमः 

ॐ वालिप्रमथनाय नमः 

ॐ वाग्मिने नमः 

ॐ सत्यवाचे नमः 

ॐ सत्यविक्रमाय नमः 

ॐ सत्यव्रताय नमः    

ॐ व्रतधराय नमः 

ॐ सदाहनुमदाश्रिताय नमः 

ॐ कौसलेयाय नमः 

ॐ खरध्वंसिने नमः 

ॐ विराधवधपंडिताय नमः 

ॐ विभीषणपरित्रात्रे नमः 

ॐ हरकोदण्डखण्डनाय नमः 

ॐ सप्ततालप्रभेत्रे नमः 

ॐ दशग्रीवशिरोहराय नमः 

ॐ जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमः   

ॐ ताटकांतकाय नमः 

ॐ वेदांतसाराय नमः 

ॐ वेदात्मने नमः 

ॐ भवरोगस्य भेषजाय नमः 

ॐ दूषणत्रिशिरोहंत्रे नमः 

ॐ त्रिमूर्तये नमः 

ॐ त्रिगुणात्मकाय नमः 

ॐ त्रिविक्रमाय नमः 

ॐ त्रिलोकात्मने नमः 

ॐ पुण्यचारित्रकीर्तनाय नमः    

ॐ त्रिलोकरक्षकाय नमः 

ॐ धन्विने नमः 

ॐ दंडकारण्यवर्तनाय नमः 

ॐ अहल्याशापविमोचनाय नमः 

ॐ पितृभक्ताय नमः 

ॐ वरप्रदाय नमः 

ॐ जितेंद्रियाय नमः 

ॐ जितक्रोधाय नमः 

ॐ जितमित्राय नमः 

ॐ जगद्गुरवे नमः    

ॐ ऋक्षवानरसङ्घातिने नमः 

ॐ चित्रकूटसमाश्रयाय नमः 

ॐ जयंतत्राणवरदाय नमः 

ॐ सुमित्रापुत्रसेविताय नमः 

ॐ सर्वदेवादिदेवाय नमः 

ॐ मृतवानरजीवनाय नमः 

ॐ मायामारीचहंत्रे नमः 

ॐ महादेवाय नमः 

ॐ महाभुजाय नमः 

ॐ सर्वदेवस्तुताय नमः   

ॐ सौम्याय नमः 

ॐ ब्रह्मण्याय नमः 

ॐ मुनिसंस्तुताय नमः 

ॐ महायोगिने नमः 

ॐ महोदराय नमः 

ॐ सुग्रीवेप्सितराज्यदाय नमः 

ॐ सर्वपुण्याधिकफलाय नमः 

ॐ स्मृतसर्वौघनाशनाय नमः 

ॐ आदिपुरुषाय नमः 

ॐ परमपुरुषाय नमः    

ॐ महापुरुषाय नमः 

ॐ पुण्योदयाय नमः 

ॐ दयासाराय नमः 

ॐ पुराणपुरुषोत्तमाय नमः 

ॐ स्मितवक्त्राय नमः 

ॐ मितभाषिणे नमः 

ॐ पूर्वभाषिणे नमः 

ॐ राघवाय नमः 

ॐ अनंतगुणगंभीराय नमः 

ॐ धीरोदात्तगुणोत्तमाय नमः     

ॐ मायामानुषचारित्राय नमः 

ॐ महादेवादिपूजिताय नमः 

ॐ सेतुकृते नमः 

ॐ जितवाराशये नमः 

ॐ सर्वतीर्थमयाय नमः 

ॐ हरये नमः 

ॐ श्यामाङ्गाय नमः 

ॐ सुंदराय नमः 

ॐ शूराय नमः 

ॐ पीतवाससे नमः     

ॐ धनुर्धराय नमः 

ॐ सर्वयज्ञाधिपाय नमः 

ॐ यज्विने नमः 

ॐ जरामरणवर्जिताय नमः 

ॐ शिवलिङ्गप्रतिष्ठात्रे नमः 

ॐ सर्वापगुणवर्जिताय नमः 

ॐ परमात्मने नमः 

ॐ परब्रह्मणे नमः 

ॐ सच्चिदानंदविग्रहाय नमः 

ॐ परंज्योतिषे नमः    

ॐ परंधाम्ने नमः 

ॐ पराकाशाय नमः 

ॐ परात्पराय नमः 

ॐ परेशाय नमः  

ॐ पारगाय नमः 

ॐ पाराय नमः 

ॐ सर्वदेवात्मकाय नमः 

ॐ परस्मै नमः    

     इति श्रीरामाष्टोत्तरशतनामावलिस्समाप्ता 

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श्री रामचन्द्रा – Sri RamaChandra

Wednesday, March 24th, 2010

Sri Rama Rama Rameti Rame Rame Manorame

Sahasra Nama Tattulyam Rama Nama Varanane

श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे

सहस्र नामा तत्तुल्यं राम नामा वरानने

Sri Raghavam Dasaradhatmajama MaPrameyam
Seehapatim Raghuvarnvayaratna deeepam
Aajanubhahum Aravidha Dhallayataatkshayam
Ramam nisacharavinasakaram Navami

अगस्त्यसंहिताके अनुसार चैत्र शुक्ल नवमीके दिन पुनर्वसु नक्षत्र, कर्कलग्‍नमें जब सूर्य अन्यान्य पाँच ग्रहोंकी शुभ दृष्टिके साथ मेषराशिपर विराजमान थे, तभी साक्षात्‌ भगवान्‌ श्रीरामका माता कौसल्याके गर्भसे जन्म हुआ।

चैत्र शुक्ल नवमी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। आज ही के दिन तेत्रा युग में रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ अखिल ब्रम्हांड नायक अखिलेश ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था। दिन के बारह बजे जैसे ही सौंदर्य निकेतन, शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण कि‌ए हु‌ए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हु‌ए तो मानो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो ग‌ईं।

उनके सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे। श्रीराम के जन्मोत्सव को देखकर देवलोक भी अवध के सामने फीका लग रहा था। देवता, ऋषि, किन्नार, चारण सभी जन्मोत्सव में शामिल होकर आनंद उठा रहे थे। आज भी हम प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल नवमी को राम जन्मोत्सव मनाते हैं और राममय होकर कीर्तन, भजन, कथा आदि में रम जाते हैं।

रामजन्म के कारण ही चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी कहा जाता है। रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का श्रीगणेश किया था। उस दिन जो कोई व्यक्ति दिनभर उपवास और रातभर जागरणका व्रत रखकर भगवान्‌ श्रीरामकी पूजा करता है, तथा अपनी आर्थिक स्थितिके अनुसार दान-पुण्य करता है, वह अनेक जन्मोंके पापोंको भस्म करनेमें समर्थ होता है।

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