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हनुमानजी की अष्टोत्तरशत नामावलि (Hanumanji Ashottarams)

Thursday, May 13th, 2010

ॐ मनोजवं मारुततुल्य वेगं,जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्

वातात्मजं वानरयूध मुख्यं,श्री रामदूतं शिरसा नमामि

श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशत नामावलि – 108 Names of Lord Hanuman

      ॐ आञ्जनेयाय  नमः

      ॐ महावीराय  नमः

      ॐ हनूमते नमः

      ॐ मारुतात्मजाय  नमः

      ॐ तत्वज्ञानप्रदाय  नमः

      ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय  नमः

      ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे  नमः

      ॐ सर्वमायाविभंजनाय  नमः

      ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः

      ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय  नमः

      ॐ परविद्या परिहाराय  नमः

      ॐ पर शौर्य विनाशकाय नमः

      ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः

      ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय  नमः

      ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः

      ॐ भीमसेन सहायकृथे  नमः

      ॐ सर्वदुखः हराय  नमः

      ॐ सर्वलोकचारिणे नमः

      ॐ मनोजवाय नमः

      ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय  नमः

      ॐ सर्व मन्त्र स्वरूपाय नमः

      ॐ सर्व तन्त्र स्वरूपिणे  नमः

      ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय  नमः

      ॐ कपीश्वराय नमः

      ॐ महाकायाय  नमः

      ॐ सर्वरोगहराय  नमः

      ॐ प्रभवे नमः

      ॐ बल सिद्धिकराय  नमः

      ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय  नमः

      ॐ कपिसेनानायकाय  नमः

      ॐ भविष्यथ्चतुराननाय  नमः

      ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे  नमः

      ॐ रत्नकुन्डलाय नमः

      ॐ दीप्तिमते  नमः

      ॐ चन्चलद्वालसन्नद्धाय  नमः

      ॐ लम्बमानशिखोज्वलाय  नमः

      ॐ गन्धर्व विद्याय नमः

      ॐ तत्वञाय  नमः

      ॐ महाबल पराक्रमाय  नमः

      ॐ काराग्रह विमोक्त्रे  नमः

      ॐ शृन्खला बन्धमोचकाय नमः

      ॐ सागरोत्तारकाय  नमः

      ॐ प्राज्ञाय  नमः

      ॐ रामदूताय  नमः

      ॐ प्रतापवते  नमः

      ॐ वानराय  नमः

      ॐ केसरीसुताय नमः

      ॐ सीताशोक निवारकाय  नमः

      ॐ अन्जनागर्भ संभूताय नमः

      ॐ बालार्कसद्रशाननाय  नमः

      ॐ विभीषण प्रियकराय नमः

      ॐ दशग्रीव कुलान्तकाय  नमः

      ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे  नमः

      ॐ वज्र कायाय  नमः

      ॐ महाद्युथये  नमः

      ॐ चिरंजीविने  नमः

      ॐ राम भक्ताय  नमः

      ॐ दैत्य कार्य विघातकाय  नमः

      ॐ अक्षहन्त्रे नमः

      ॐ काञ्चनाभाय  नमः

      ॐ पञ्चवक्त्राय  नमः

      ॐ महा तपसे  नमः

      ॐ लन्किनी भञ्जनाय  नमः

      ॐ श्रीमते  नमः

      ॐ सिंहिका प्राण भन्जनाय नमः

      ॐ गन्धमादन शैलस्थाय नमः

      ॐ लंकापुर विदायकाय  नमः

      ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः

      ॐ धीराय  नमः

      ॐ शूराय  नमः

      ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः

      ॐ सुवार्चलार्चिताय  नमः

      ॐ तेजसे  नमः

      ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः

      ॐ कामरूपिणे  नमः

      ॐ पिन्गाळाक्षाय नमः

      ॐ वार्धि मैनाक पूजिताय नमः

      ॐ कबळीकृत मार्तान्ड मन्डलाय  नमः

      ॐ विजितेन्द्रियाय  नमः

      ॐ रामसुग्रीव सन्धात्रे नमः

      ॐ महिरावण मर्धनाय  नमः

      ॐ स्फटिकाभाय  नमः

      ॐ वागधीशाय नमः

      ॐ नवव्याकृतपण्डिताय  नमः

      ॐ चतुर्बाहवे  नमः

      ॐ दीनबन्धुराय  नमः

      ॐ मायात्मने  नमः

      ॐ भक्तवत्सलाय  नमः

      ॐ संजीवननगायार्था नमः

      ॐ सुचये  नमः

      ॐ वाग्मिने  नमः

      ॐ दृढव्रताय नमः

      ॐ कालनेमि प्रमथनाय  नमः

      ॐ हरिमर्कट मर्कटाय  नमः

      ॐ दान्ताय  नमः

      ॐ शान्ताय  नमः

      ॐ प्रसन्नात्मने नमः

      ॐ शतकन्टमुदापहर्त्रे  नमः

      ॐ योगिने  नमः

      ॐ रामकथा लोलाय  नमः

      ॐ सीतान्वेशण पठिताय नमः

      ॐ वज्रद्रनुष्टाय  नमः

      ॐ वज्रनखाय  नमः

      ॐ रुद्र वीर्य समुद्भवाय  नमः

      ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारकाय  नमः

      ॐ पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने नमः

      ॐ शरपंजरभेधकाय  नमः

      ॐ दशबाहवे  नमः

      ॐ लोकपूज्याय नमः

      ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय  नमः

      ॐ सीतासमेत श्रीरामपाद सेवदुरन्धराय  नमः

  इति श्री आञ्जनेय अष्टोत्तरशत नामावलि संपूर्णम्

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हनुमानजी की आरती (Lord Hanuman Aarti)

Friday, April 30th, 2010

आरती हनुमानजी की - Hanumanji Ki Aarti

 आरति कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..

जाके बल से गिरिवर काँपे
रोग दोष जाके निकट न झाँके .
अंजनि पुत्र महा बलदायी
संतन के प्रभु सदा सहायी ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

दे बीड़ा रघुनाथ पठाये
लंका जाय सिया सुधि लाये .
लंका सौ कोटि समुद्र सी खाई
जात पवनसुत बार न लाई ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

लंका जारि असुर संघारे
सिया रामजी के काज संवारे .
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे
आन संजीवन प्राण उबारे ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

पैठि पाताल तोड़ि यम कारे
अहिरावन की भुजा उखारे .
बाँये भुजा असुरदल मारे
दाहिने भुजा संत जन तारे ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

सुर नर मुनि जन आरति उतारे
जय जय जय हनुमान उचारे .
कंचन थार कपूर लौ छाई
आरती करति अंजना माई ..
आरति कीजै हनुमान लला की .

जो हनुमान जी की आरति गावे
बसि वैकुण्ठ परम पद पावे .
आरति कीजै हनुमान लला की .
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ..

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